तहलका

तहलका के 31 दिसंबर 2017 के अंक में विजय माथुर जी के लेख में समाज के विकृत पहलू पर बारीकी से विचार किया गया है। रेगर ने उदयपुर के राजसमंद में  जो 6 दिसंबर को बर्बर  कृत्य किया है , वह लोकत्रांत्रिक , धर्म निरपेक्ष भारत पर एक धब्बा सरीखा है। कानून को अपने हाथ […]

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Digital World

डिजिटल दुनिया के खतरे  आउटलुक का 23 अप्रैल का अंक डिजिटल दुनिया के स्याह पहलुओं पर बारीकी से प्रकाश डालता है। फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण के बाद आम आदमी की सोच और निणर्य लेने की क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे है। प्रसंगवश मुझे रामधारी सिंह दिनकर की कुरुक्षेत्र में लिखी दो पंक्तियाँ याद

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That air hostess

वो अशिष्ट एयर होस्ट्रेस  13 अप्रैल 2018 की दिल्ली के एयरपोर्ट – टर्मिनल 3 से जेट एयरवेज की अहमदाबाद को जाने वाली रात 11 बजे की फ्लाइट। यह लगातार  तीसरी रात थी  मैं चाह कर भी सो नहीं पा रहा था। पिछले 72 घंटो में 1 घंटे भी सो नहीं पाया था। फ्लाइट कुछ देर से

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OUTLOOK- PRIZE WINING LETTER

ख़ुदकुशी क्यों इतनी  26 मार्च 2018 अंक  ख़ुदकुशी के संदर्भ में हरिमोहन मिश्र जी का लेख , समकालीन समय की विसंगतियों को पारदर्शी चित्रण करता है। मानव जीवन अनमोल है और इस अनमोल जीवन को यूँ ही हार कर गवां देना उचित नहीं कहा जा सकता है। हमने समय से साथ खूब प्रगति की है

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BUDGET 2017-18

ऐतिहासिक व अभूतपूर्व बजट  योजना का बजट अंक हमेशा से अपने सारगर्भित , विश्लेषणात्मक व रोचक लेखों के लिए हमेशा से लोकप्रिय  रहा है। पहले ही लेख में वस्तु एवं सेवाकर प्रणाली के आधार स्तम्भ माने जाने वाले  हसमुख अढ़िया जी ने  सम्पूर्ण बजट को साररुप में प्रस्तुत कर दिया गया है। उनका ठीक ही कहना है

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An evening in mukherjee nagar, delhi

भइया क्या चाहिए ? हमेशा की तरह इस बार शुरुआत खाने से हुई । अग्रवाल स्वीट्स में इमरती खाने से हुई , काफी अरसा हो गया था इसे खाये हुए । इसके बाद कुछ पत्रिकाओं , किताबों की खरीद और फिर यूँ ही घूमना और भीड़ को देखना । जब भी मुखर्जी नगर आना होता

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दुक्खम सुक्खम : A novel by Mamta Kaliya

दुक्खम सुक्खम  : ममता कालिया का व्यास पुरुस्कार से सम्मानित उपन्यास  274 पेज का यह नावेल वर्ष 2010 में प्रकाशित हुआ था। इसे 27 वा , 2017 का व्यास सम्मान दिया गया है । 9 दिसंबर की पोस्ट में मैंने लिखा था कि इसे पढ़ने वाला हूँ। तब इसे धीरे धीरे पढ़ता रहा और पिछले दिनों इसे

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A very bad time for me and my family

प्रिय दोस्तों , 23 फरवरी 2018 को मेरे छोटे भाई विकास ( आयु -25 वर्ष ) जोकि लेखपाल के तौर पर जॉब कर रहा था एक सड़क दुर्घटना में  मौत हो गयी है। 2010 में पिता जी मौत के बाद धीरे धीरे परिवार में चीजे काफी हद तक व्यस्थित हो गयी थी पर इस दुखद

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How to double former income

[ This letter has been published in yojna hindi feb 2018 issue .] ‘बैकिंग सुधार‘ पर क्रेन्द्रित योजना का जनवरी 2018 अंक मिला। आजादी के बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंको की बेहद अहम भूमिका रही है। 2008 के वैश्विक मंदी के दौर में जब अमेरिका के बेहद मजबूत बैंक , एक एक कर धराशायी

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Muktibodh ki kvita

मर गया देश , जीवित रह गए तुम                    ‘आजकल‘ का प्रगतिवादी कवि मुक्तिबोध की जन्मशती पर केंद्रित अंक समय पर डाक द्वारा मिला। लेखों पर राय देने के पूर्व मै आजकल की पूरी टीम को उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ विशेष रूप से

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