Race

दौड़ इंटर करते ही जीवन की दौड़ शुरू हो गयी , जूझता रहा, गिरा , चोट भी खाई पर आगे बढ़ता गया … अभी भी दौड़ खत्म न हुयी है पर अब कभी कभी सकून से सांस लेता हूँ …….. पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है …………… ज़िंदगी मे हासिल काफी

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दिनकर की कविता मे राष्ट चेतना

दिनकर की कविता मे राष्ट चेतना  भावों के आवेग प्रबल    मचा रहे उर में हलचल    रेणुका  पूछेगा बूढ़ा विधाता तो मैं कहूँगा    हाँ तुम्हारी सृष्टि को हमने मिटाया। रे रोक युद्धिष्ठिर को न यहाँ    जाने दे उनको स्वर्ग धीर    पर फिरा हमें गांडीव गदा    लौटा दे अर्जुन भीम वीर।      हिमालय कितनी मणियाँ

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यशपाल का ” झूठा सच”

यशपाल का ” झूठा सच” भारत विभाजन की मार्मिक अभिव्यक्ति  दो भागो मे -1 वतन और देश 2 देश का भविषय  प्रमुख पात्र – जयदेव पूरी ,उसकी बहन तारा , उसकी प्रेमिका कनक , मास्टर राम लुभाया , इनके बड़े भाई राम ज्वाला , डा. प्राणनाथ , पहला भाग लाहौर की कथा है तो दूसरे

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Difference between law and morality

विधि और नैतिकता में विभेद विधि और नैतिकता समाज के लगभग सभी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। विधि और नैतिकता अक्सर एक साथ मिलकर नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जनता के कल्याण की रक्षा करने के लिए किये गए प्रयासों में समन्वय सुनिश्चित करने का काम करते हैं। कई अलग-अलग संस्थाएँ नैतिकता के नियमों के

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Social Values vs. Economic Values

प्रश्न । सामाजिक मूल्य, आर्थिक मूल्यों की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण है राष्ट्र की समावेशी संवृद्धि के सन्दर्भ में इस कथन की चर्चा करें। उत्तर – 1. सामाजिक मूल्यों से तात्पर्य ऐसे मूल्यों से है जो मनुष्य के सामाजिक जीवन से जुड़े हो जैसे- ईमानदारी, तटस्थता, समानुभूति, उत्तरदायित्व,निष्पक्षता, सहनशीलता, दया, देशभक्ति, न्याय आदि। आर्थिक मूल्यों का अर्थ

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Environmental Ethics

पर्यावरणीय नैतिकता 1. पर्यावरणीय नैतिकता , नैतिकता का ही एक अंग है जो मनुष्य तथा पर्यावरण के मध्य सम्बन्ध को प्रदर्शित करती है। इसके अनुसार मनुष्य एक ऐसे समाज का हिस्सा है जिसमे मानव जाति के साथ सभी प्राणी , जीव जन्तु तथा पेड़ पौधे भी शामिल है। यह मानवीय मूल्यों तथा नैतिक सिद्धान्तों के

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Tax to GDP ratio

टैक्स टू जीडीपी अनुपात 1. किसी भी सरकार द्वारा संगृहीत किये गए कर को उसी वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद से विभाजित करने से प्राप्त अनुपात । 2. भारत का टेक्स टू जीडीपी अनुपात बहुत ही असंतोजनक रहा है 1950-51 में 6% था और 2013-14 में ये बढ़कर केवल 16.6% रहा। भारत जी-20 देशों में

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Common civil code

समान नागरिक संहिता को अभिनियमित करने से रोकने वाले कारक- 1.कट्टर धार्मिकता तथा रूढ़िवादिता- नागरिकों में शिक्षा तथा जागरूकता अभाव, जिस कारण वे समान नागरिक संहिता का विरोध करते है। 2. राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी- राजनेता अपना वोट बैंक बनाये रखने के लिए कोई भी कड़ा कदम उठाने से हिचकिचाते है। 3. समान नागरिक

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Reason for success

सफलता की वजह मै घूम फिर कर चिन्तक जी पर ही आ जाता हूँ….क्या करू उनके जैसे बहुत कम ही लोग है….उनकी जुबान में जादू है .. बड़े से बड़ा प्रेरक वक्ता भी वह जादू मुझ पर वो असर नही डाल सकता है जो उनकी बात में मुझे मिल जाता था… एक शाम हॉस्टल में

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